Mind Power स्मरण शक्ति का रहस्य


स्मरण शक्ति Mind Power का रहस्य





मस्तिष्क (Mind Power) विशेषज्ञों का कथन है की मस्तिष्क में ३० हजार करोड़ से अधिक तंत्रिका कोशिकाएँ पाई जाती है. बचपन से लेकर युवावस्था तक ये बराबर काम करती है, किन्तु ४५ वर्ष की उम्र के बाद ये कोशिकाएँ शिथिल पड़ने लगती है. इनके शिथिल पड़ने से व्यक्ति की स्मरण शक्ति कम होने लगती है और वह भूलें करने लगता है.





Mind Power





विशेषज्ञों का मानना है की मस्तिष्क तंत्रिकाओ में गतिशील विद्युत धरा ही स्मरण शक्ति का आधार है, यह विद्युत धारा ही स्मृतियों को संजोकर रखती है. मस्तिष्क व तंत्रिकाओ की क्रियाशीलता ही तेज स्मरण शक्ति की धौतक है.





वैज्ञानिक कहते है कि मस्तिष्क में एक ऐसा रसायन होता है कि जो स्मरण शक्ति का आधार है. स्मरण शक्ति का कम या अधिक होना इसी रसायन पर निर्भर करता है. केलिफोर्निया विश्व विद्यालय के वैज्ञानिको ने इस रसायन का नाम “कालपेन” रखा है. यह रसायन एक प्रकार का एंजाइम है.





यह रसायन मस्तिष्क तंतुओ को नया सम्पर्क बनाने में सहायता करता है. इन सम्पर्को के कारण ही व्यक्ति की स्मरण शक्ति लम्बे समय तक बनी रह सकती है. शब्दों को याद रखने में मस्तिष्क के विभिन्न भाग एक दूसरे में आकर कार्य करते है, किन्तु यह सम्पर्क अत्यंत नाजुक होता है.





जो सर में गहरा आघात आदि लगने से टूट जाता है. इससे शब्दों या भाषा को याद रखने और अभिव्यक्त करने में बड़ी कठिनाई आती है. वैज्ञानिको के अनुसार प्राय: काल की सेर, व्यायाम, सायकल चलाने, प्राणायाम, एकाग्रचित होने, शरीर के स्वस्थ होने, जल्दी उठने, ध्यान से लिखने, पढने, सुनने, देखने आदि से स्मरण शक्ति बढती है.





इसके अलावा लोहा व जिंक लवणों की गंभीरता कमी से भी मानसिक कार्य ठीक ढंग से नहीं हो सकता है. अत: यदि फल, सब्जियाँ, फलियाँ आदि भोजन के रूप में नियमित ली जाएँ. तो स्मरण शक्ति पर बड़ा असर पड़ता है. किसी भी प्रकार के नशे, बीडी, सिगरेट, नींद की गोलियाँ कम या अधिक नींद, मानसिक थकान, तनाव, आलस्य आदि भी कुछ हद तक स्मरण शक्ति को कम करते है.


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